"गुरु का मिलना आसान है, परंतु आदर्श शिष्य का मिलना कठिन"
इसी प्रसंग में आज यह दोहा मेरे उन सभी छात्रों को समर्पित है जो मेरी यादों में बसे हुए हैं और मुझे हर समय अपनत्व का एहसास दिलाते हैं।
गुरु शिष्य दोऊ खड़े,किसको कहूं महान।
बलिहारी मैं उन शिष्यों पर , जिन्होंने दिलाया मुझे सम्मान।।